Film Review: सचिन: ए बिलियन ड्रीम्स- एक खिलाड़ी क्रिकेट में कैसे बना ‘भगवान’

फिल्म का नाम: सचिन: ए बिलियन ड्रीम्स

डायरेक्टर: जेम्स अर्स्किन

स्टार कास्ट: सचिन तेंदुलकर, अंजली तेंदुलकर, सारा तेंदुलकर, अर्जुन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, वीरेंद्र सहवाग

अवधि: 2 घंटा 19 मिनट

सर्टिफिकेट: U

रेटिंग: 4 स्टार

भारत में क्रिकेट को त्यौहार की तरह मनाया जाता है. भारतीय क्रिकेट टीम में अलग-अलग दशक में कई खिलाड़ी आए और अपना जलवा दिखाए, लेकिन एक ऐसा खिलाड़ी है जिसे हर तबके के लोगों ने पूरा सम्मान दिया और उन्हें ‘क्रिकेट के भगवान’ की उपाधि भी दे दी गई. इसी खिलाड़ी यानी सचिन रमेश तेंदुलकर की जीवनी पर आधारित कहानी है ‘सचिन: अ बिलियन ड्रीम्स

आईए जानते हैं, आखिर कैसी बनी है यह फिल्म

कहानी:

यह कहानी मुंबई के दादर इलाके में जन्म लिए सचिन रमेश तेंदुलकर की है. जब दस साल की उम्र में वो भारतीय क्रिकेट टीम को 1983 के वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाते हुए देखता है तो उसके भीतर भी एक अलग जज्बा जाग उठता है और उसके ठीक 28 साल बाद 2011 में वही सचिन खुद अपने हाथ में ट्रॉफी उठाते हुए दिखाई देता है. फिल्म में बचपन में सचिन की क्रिकेट के प्रति भूख को दर्शाया गया है, साथ ही शिवाजी पार्क से लेकर विश्व के बड़े-बड़े ग्राउंड में किस तरह से इस लिटिल मास्टर ने भारत का परचम लहराया, यह सब दिखाया गया है. उनके पर्सनल लाइफ और करियर से जुड़े विवादों को भी दिखाया गया है.

इसलिए देखें फिल्म:

फिल्म में विश्व स्तर के महानतम क्रिकेट खिलाड़ी सचिन की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को दर्शाने का प्रयास किया गया है, जिससे शायद दर्शक कम अवगत हों.

सचिन तेंदुलकर के साथ-साथ उनकी पत्नी अंजली, बेटा अर्जुन और बेटी सारा भी इस फिल्म का हिस्सा हैं, जिन्हें बहुत ही कम बातचीत करते हुए देखा गया है. फिल्म में सचिन के सपनों को दर्शाया गया है. साथ ही क्रिकेट के अलग-अलग फेज में स्ट्रगल भी दिखाई गई है.

बचपन में लोगों को टायर पंक्चर कर देने वाला नटखट लड़का किस तरह से अपनी बहन सविता के द्वारा क्रिकेट का बैट पाकर बेहद खुश होता है और फिर भाई अजित के साथ आचरेकर गुरू के सानिध्य में क्रिकेट की ट्रेनिंग लेता है, यह सभी बातें बखूबी दर्शाई गई हैं.

सचिन और अंजली की प्रेम कहानी भी फिल्म में बतायी गई है, जिसे कुछ वीडियोज के साथ भी दर्शाया गया है. किस तरह से हर कदम सचिन के लिए अंजली ने कई बलिदान दिए. वहीं सचिन जब भी वक्त मिलता था, वो परिवार को समय देते थे और अंजली से कहते थे कि मैं बस डायपर नहीं बदलूंगा.

फिल्म में कई दिलचस्प क्रिकेट के पल भी आते हैं, जैसे वेंकटेश प्रसाद और आमिर सोहेल का किस्सा, सचिन और शेन वार्न की टक्कर, डैड की जेथ के बाद दोबारा वर्ल्ड कप टीम ज्वाइन करना, शारजाह कप, सौरव गांगुली का हवा में टी शर्ट घुमाना, 2003 में फिक्सिंग कॉन्ट्रोवर्सी के बाद द्रविड़ और लक्ष्मण के बीच बड़ी साझेदारी की बदौलत आस्ट्रेलिया को हराना और साथ ही 2011 का वर्ल्ड कप जीतना आदि. ये मोमेंट एक क्रिकेट प्रेमी के लिए बहुत बड़े पल हैं.

फिल्म के कमजोर कड़ियां:

अजहरुद्दीन के साथ मनमुटाव और विनोद कांबली से जुडी कहानी को और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था.

फिल्म एक डाक्यू ड्रामा है, जिसमें समय-समय पर सूत्रधार बदलते हैं. यह शायद सबको पसंद ना आए.

बॉक्स ऑफिस:

फिल्म की लागत लगभग 30 करोड़ बताई जा रही है और इसे लगभग 1200 स्क्रीन्स में रिलीज किया जाएगा. फिल्म को हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी, मराठी, तमिल और तेलुगु भाषाओं में भी रिलीज किया जाने वाला है. सचिन की इस फिल्म को केरल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में पहले ही टैक्स फ्री कर दिया गया है और कहा जा रहा है कि पहले वीकेंड से बहुत बड़ी उम्मीद की जा रही है।

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