‘फ्रीकी अली’ फ़िल्म समीक्षा

सोहेल खान ने अपने करियर में कई फिल्में डायरेक्ट की हैं जैसे ‘औजार’, ‘हेलो ब्रदर’, ‘मैंने दिल तुझको दिया’, ‘जय हो’ इत्यादि, लेकिन उनकी सबसे ज्यादा सफल फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ को माना जाता है। इस बार सोहेल ने 1996 की अमेरिकन स्पोर्ट्स फिल्म ‘हैप्पी गिलमोर’ से प्रेरित होकर ‘फ्रीकी अली’ बनाई है, आइए जानते हैं फिल्म ‘फ्रिकी अली’ के बारे में, कैसी है ?

यह कहानी मुंम्बई के अली (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) की है, जो चड्ढी बेचने का काम करता है लेकिन काम से निकाले जाने के बाद लोकल गुंडे मकसूद (अरबाज खान) के साथ फिरौती वसूली का धंधा करता है। वैसे तो अली को क्रिकेट में इंट्रेस्ट है लेकिन एक दिन जब वो मकसूद के साथ गोल्फ कोर्स में वसूली के लिए जाता है तो उसकी किस्मत बदल जाती है। जब बिजनेसमैन उसे गोल्फ खेलते हुए चैलेंज करता है तो अली एक बार में ही गोल्फ की गेंद को गड्ढे के अंदर डाल देता है। फिर इसी बीच उसकी नजर मेघा (एमी जैक्सन) पर पड़ती है जो गोल्फ चैंपियन विक्रम (जस अरोड़ा) की मैनेजर है और अली को मेघा से पहली नजर में प्यार हो जाता है, लेकिन इस प्यार को पाने के लिए अली को एक बड़ी परीक्षा देनी पड़ती है, कई सारे उतार-चढ़ाव भी आते हैं और आखिरकार अली को मेघा मिल जाती है। फिल्म की स्क्रिप्ट काफी सिंपल है और लोट-पोट करने वाले संवादों से भरी है। फर्स्ट हाफ काफी मनोरंजक है, सेकंड हाफ थोड़ा खींचा हुआ दिखाई पड़ता है जो वास्तविकता से काफी परे नजर आता है। फिल्म में नवाजुद्दीन ने बहुत ही उम्दा एक्टिंग की है, वहीं सीमा बिस्वास और अरबाज खान का काम भी अच्छा है, बाकी सह कलाकारों जैसे एमी जैक्सन, जस अरोड़ा, निकितन धीर ने भी सहज अभिनय किया है।

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