“अकीरा” फ़िल्म समीक्षा

यह कहानी अकीरा शर्मा (सोनाक्षी सिन्हा) की है जो जोधपुर में अपने परिवार के साथ रहती है।  बचपन से ही उसे सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग मिली है।  पिता की मौत के बाद अकीरा अपनी मां के साथ मुंबई अपने भाई के घर आ जाती है और कालेज में दाखिला ले लेती है। फिर कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एसीपी गोविंद राणे (अनुराग कश्यप) की एक कांन्ट्रोवर्शियल वीडियो लीक हो जाती है जिसकी वजह से वो अकीरा के पीछे पड़ जाता है।  क्या अकीरा खुद को निर्दोष साबित कर पाएगी? इसका पता आपको फिल्म देखकर ही चलेगा।

            डायरेक्टर एआर मुरुगदॉस ने अपने करियर में एक से बढ़कर फिल्मों का निर्देशन किया है जिनमें ‘गजनी’ और ‘हॉलिडे: अ सोल्जर नेवर ऑफ ड्यूटी’ जैसी फिल्में हैं।  हमेशा बड़े स्टार्स को लेकर फिल्में बनाने वाले मुरुगदॉस ने अबकी बार अपनी स्टाइल बदलकर अभिनेत्री सोनाक्षी के साथ ‘अकीरा’ फिल्म को डायरेक्ट किया है।

           फिल्म की स्क्रिप्ट काफी इमोशंस से गुजरती हुई एक निष्कर्ष की तरफ बढ़ती है जिसमें एक लड़की को खुद के बचाव के लिए तरह-तरह के सबूत इकट्ठा करने पड़ते हैं. हा लांकि, स्क्रिप्ट इंटरवल से पहले ठीक-ठाक ही है लेकिन उसके बाद कहानी किसी और लेवल पर चली जाती है। क्लाइमैक्स को और भी बेहतर बनाया जा सकता था. जिस तरह से फर्स्ट हाफ दिलचस्प था, उसके मुताबिक सेकेंड हाफ फीका रह गया। फिल्म में एक्शन और इमोशनल , दोनों ही रूप को सोनाक्षी ने बखूबी निभाया है। भ्रष्ट पुलिस वाले के रोल में अनुराग कश्यप ने काफी उम्दा अभिनय किया है। फिल्म की कमजोर कड़ी इसका सेकेंड हाफ है जो काफी फीका लगता है, जिसे छोटा किया जाता तो फिल्म और भी क्रिस्प दिखाई पड़तीविशाल-शेखर की जोड़ी ने फिल्म के लिए बेहतरीन संगीत दिया है और इमोशंस के हिसाब से संगीत फिल्म को बांधे रखता है.

रेटिंग – 3.5

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